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Vidhan Sabha
अध्याय १३ प्रस्ताव
 

१०३- लोक हित के किसी विषय पर प्रस्ताव द्वारा चर्चा- 

संविधान या इन नियमों में अन्यथा उपबन्धित अवस्था को छोड़कर अध्यक्ष की सम्मति से किये गये प्रस्ताव के बिना सामान्य लोक-हित के विषय पर कोई चर्चा नहीं होगी।

१०४- प्रस्ताव की सूचना-

नियम ११० में उपबन्धित अवस्था को छोड़कर प्रस्ताव की सूचना लिखित रूप में दी जायेगी और प्रमुख सचिव को सम्बोधित होगी।

१०५- प्रस्ताव की ग्राह्यता की शर्तें-

कोई प्रस्ताव ग्राह्य हो सके तो इसके लिए वह निम्न शर्तें पूरी करेगा, अर्थात् कि-

(१) उसमें सारवान रूप से एक ही निश्चित् प्रश्न उठाया जायेगा,

(२) उसमें प्रतर्क, अनुमान, व्यंगात्मक पद, अभ्यारोप या मान- हानिकारक कथन नहीं होंगे,

(३) उसमें व्यक्तियों की सार्वजनिक हैसियत के अतिरिक्त उनके आचरण या चरित्र के निर्देश नहीं होंगे,

(४) उसमें विशेषाधिकार का प्रश्न नहीं उठाया जायेगा,

(५) उसमें ऐसे विषय पर फिर से चर्चा नहीं उठायी जायेगी जिस पर उसी सत्र में अथवा पिछले ६ मास के भीतर, जो भी समय पहले पड़ता हो, चर्चा हो चुकी हो,

(६) उसमें ऐसे विषय की पूर्वाशा नहीं की जायेगी जिस पर उसी सत्र में चर्चा होने की संभावना हो,

(७) वह किसी ऐसे विषय से संबंधित नहीं होगा जो भारत के किसी भाग में क्षेत्राधिकार रखने वाले किसी न्यायालय के न्याय निर्णयन के अन्तर्गत हो।

१०६- अध्यक्ष प्रस्ताव की ग्राह्यता का विनिश्चय करेंगे-

अध्यक्ष विनिश्चय करेंगे कि कोई प्रस्ताव या उसका कोई भाग इन नियमों के अन्तर्गत ग्राह्य़ है अथवा नहीं और वे कोई प्रस्ताव या उसका कोई भाग अस्वीकृत कर सकेंगे जो उनकी राय में प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अधिकार का दुरूपयोग हो या सदन की प्रक्रिया में बाधा डालने या उस पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिये आयोजित हो या इन नियमों का उल्लंघन करता हो।

१०७- न्यायाधिकरण, आयोग आदि के समक्ष विषयों पर चर्चा उठाने के लिये प्रस्ताव-

ऐसे प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुज्ञा नहीं दी जायेगी जो किसी ऐसे विषय पर चर्चा उठाने के लिये हो जो किसी न्यायिक या अर्ध-न्य़ाय़िक कृत्य करने वाले किसी संविहित न्यायाधिकरण या संविहित प्राधिकारी के या किसी विषय की जांच या अनुसंधान करने के लिये नियुक्त किसी आयोग या जांच न्यायालय के सामने लम्बित हो।

                परन्तु यदि अध्यक्ष का समाधान हो जाय कि इससे न्यायाधिकरण, संविहित अधिकारी, आयोग या जांच न्यायालय द्वारा उस विषय के विचार किये जाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है तो, अध्यक्ष, स्वविवेक से ऐसे विषय को सदन में उठाने की अनुमति दे सकेंगे जो जांच की प्रक्रिया या व्याप्ति या प्रक्रम से संबंधित हो।

१०८- समय-नियतन और प्रस्तावों पर चर्चा-

अध्यक्ष, सदन के कार्य की स्थिति पर विचार करने के बाद ऐसे किसी प्रस्ताव पर चर्चा के लिये कोई एक दिन या अधिक दिन या किसी दिन का भाग नियत कर सकेंगे।

१०९- भाषणों के लिये समय-सीमा-

अध्यक्ष, यदि वे ठीक समझें भाषणों के लिये समय-सीमा विहित कर सकेंगे।

११०- बिना सूचना के प्रस्ताव-

निम्नलिखित प्रस्ताव यदि अध्यक्ष अनुज्ञा दें, बिना सूचना के किये जा सकेंगे-

(१) संवेदना या बधाई प्रस्ताव,

(२) उपवेशन स्थगित करने का प्रस्ताव,

(३) अजनबियों को हटाने का प्रस्ताव,

(४) समितियों के लिये सदस्यों के निर्वाचन का प्रस्ताव,

(५) किसी विधेयक या संकल्प या प्रस्ताव या उस पर संशोधन को वापस लेने का प्रस्ताव,

(६) किसी कार्य को स्थगित करने का प्रस्ताव,

(७) वाद-विवाद को समाप्त करने का प्रस्ताव,

(८) किसी नियम के निलम्बन का प्रस्ताव,

(९) किसी उपवेशन की कालावधि बढ़ाने का प्रस्ताव,

(१०) राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद का प्रस्ताव।

१११- प्रस्ताव की पुनरावृत्ति-

अन्यथा उपबन्धित अवस्था को छोड़कर यदि कोई प्रस्ताव लम्बित हो अथवा निस्तीर्ण किया जा चुका हो तो यथास्थिति प्रस्ताव के लम्बनकाल में अथवा उसके निस्तारण की तिथि से ६ महीने के भीतर कोई ऐसा प्रस्ताव या संशोधन प्रस्तुत नहीं किया जायेगा जिसमें सारत: वही वाद-विषय या प्रश्न उठाया जाय जो पूर्व प्रस्ताव में अन्तर्निहित था:

                    परन्तु जब तक अध्यक्ष अन्यथा निर्देश न दें, यहां कही गयी किसी बात से निम्नलिखित प्रस्तावों में से किसी प्रस्ताव के प्रस्तुत किये जाने को रोका गया नहीं समझा जायेगा, अर्थात्-

(क) किसी विधेयक को विचारार्थ लेने या प्रवर समिति या संयुक्त प्रवर समिति को निर्दिष्ट करने का प्रस्ताव जब उसी प्रकार के पिछले प्रस्ताव पर इस आशय का कोई संशोधन कि उस पर राय जानने के लिये विधेयक को घुमाया जाय या पुनः घुमाया जाय, स्वीकृत हो गया हो;

(ख) सभा के पुनर्विचार के लिये राज्यपाल द्वारा विधेयक का प्रत्यावर्तन किये जाने के उपरान्त किया गया कोई प्रस्ताव, जो ऐसे संशोधन के लिये किया जाय तो पुनर्विचारार्थ निर्दिष्ट विषय या विषयों से सुसंगत हो;

(ग) किसी विधेयक के संशोधन का प्रस्ताव जो किसी अन्य संशोधन को, जो स्वीकार हो चुका हो, आनुषंगिक हो या केवल उसका प्रारूपण बदलने के लिये आयोजित हो।

११२- कार्य-स्थगित करने के लिये प्रस्ताव-

(१) अनुच्छेद २०४ के अन्तर्गत विनियोग विधेयक के अतिरिक्त किसी अन्य विधेयक पर, जो पुरःस्थापित किया जा चुका हो अथवा कार्य-स्थगन प्रस्ताव के अतिरिक्त किसी अन्य प्रस्ताव पर अथवा संकल्प पर विचार को उसी सत्र में ऐसे कार्य के लिये उपलब्ध किसी भावी दिन अथवा भावी सत्र में अनिश्चित काल के लिये स्थगित करने का प्रस्ताव किसी भी सदस्य द्वारा किसी समय प्रस्तुत किया जा सकेगा और ऐसे प्रस्ताव को तत्समय सभा के सम्मुख अन्य प्रस्तावों पर अग्रेता होगी। अध्यक्ष, प्रस्तावक को तथा यदि प्रस्ताव का विरोध किया जाय तो विरोध करने वाले सदस्य को संक्षिप्त व्याख्यात्मक वक्तव्य देने का अवसर देने के बाद और आगे वाद-विवाद के बिना उस पर प्रश्न उपस्थित कर सकेंगे।

(२) असरकारी सदस्यों के कार्य को किसी निर्धारित दिन के लिये स्थगित करने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाय तो स्थगित कार्य को उस दिन के लिये नियत सरकारी सदस्यों के कार्य पर प्राथमिकता मिलेगी।

(३) अध्यक्ष कार्य स्थगित करने के ऐसे प्रस्ताव को अस्वीकृत कर सकेंगे यदि उनकी राय में प्रस्ताव सभा के कार्य में बाधा डालने या उपवेशन को स्थगित कराने के प्रयोजन से किया गया है।

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११३- विवादान्त-

(१) किसी प्रस्ताव के किये जाने के उपरान्त किसी समय भी कोई सदस्य यह प्रस्ताव कर सकेंगे कि "अब प्रश्न उपस्थित किया जाय" और जब तक कि अध्यक्ष को यह प्रतीत न हो कि प्रस्ताव इन नियमों का दुरूपयोग है या युक्ति-युक्त वाद-विवाद के अधिकार का उल्लंघन करता है, अध्यक्ष प्रस्ताव रखेंगे कि "अब प्रश्न उपस्थित किया जाय"।

(२) जब उप नियम (१) के अन्तर्गत प्रस्ताव स्वीकृत हो जाय तो उसके आनुषंगिक प्रश्न या प्रश्नों को और आगे वाद-विवाद के बिना तत्काल प्रस्तुत कर दिया जायगा:

                                परन्तु अध्यक्ष किसी सदस्य के उत्तर देने के अधिकार को अनुज्ञापित करेंगे जो उसे इन नियमों के अन्तर्गत प्राप्त हो

 
 

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